Irade

Story Section No. 3

https://www.wikidata.org/wiki/Q16734076
Story-of-Irade

हर रोज़ की तरह महादेव सर रात को सब के सो जाने के बाद स्कूल का मौयेना करते और साहिल को भी चुपके से देख कर चले जाते. यह सिल-सिला एक महीने तक चलता रहा.
महादेव सर का जिस शहर में अखाडा था उस शहर का नाम परभानी था. परभानी में एक ही नेता पिछले दस साल से चुनकर आ रहा था, यानी लगातार चौथी बार भी वंही नेता चुनकर आया था. उस नेता का नाम संतोष मुरकुटे था. वह नेता जब से चुन के आया था तब से अपनी सालगिरह पर कुश्ती के मैच रखता था. कुश्ती ही क्यों ?. इस लिए क्यों की परभानी और परभानी के अतराफ़ जितने भी गांव थे उन सब का कुश्ती ही पसंदीदा खेल था. इस लिए संतोष हर साल अपनी बैदाइश पर दंगल का प्रोग्राम रखता था.
कल दंगल था इस लिए आज ही संतोष मुरकुटे के लोग अखाड़े में जाते उनके पहेलवान का नाम लेते और जितने अखाड़े थे उन सब ने अपने अखाड़े से अपने एक पहेलवान का नाम दिया. महादेव सर ने भी अपने अखाड़े में से एक पहेलवान का नाम दिया लेकिन किसका नाम दिया यह किसी से कहा नहीं.
सभी दंगल के मैदान पर पहोंचे, महादेव सर ने साहिल को अपने करीब ही रुकाया. दंगल शुरूं हो गया, पहले दुसरे अखाड़े के पच्चों की कुश्ती हुवी इनका हार जीत का फैसला हो गया. फिर आई महादेव सर के अखाड़े के बच्चे की बारी,
महादेव सर के अखाड़े से साहिल का नाम पुकारा गया. साहिल का नाम सुनते हे खुद साहिल और साहिल के साथ काम करने वाले और जितने भी सिखने वाले लड़के थे वह और साहिल बहोत ज्यादा चौक गए.
महदेव सर ने साहिल से कहा:- तैयार होजा आज से तू भी पहेलवान बन्ने जा रहा है.
महादेव सर ने साहिल को तैयार किया और साहिल का हाथ पकड़ कर ले गए ग्राउंड पर और साहिल से कहा.
मुझे तुम पर पूरा भरोसा हैं के तुम इस को पल-भर में हरा सकते हो.
साहिल को महादेव सर की यह बात सुनकर बहोत हिम्मत मिली. साहिल महादेव सर से कहेता हैं उस पहेलवान की तरफ देखते हुवे.
सर मै आपको कभी भी नाराज़ नहीं करूँगा मर जाऊंगा लेकिंग हार नहीं मानुगा और आपके विश्वास की ताकत से मै इसे पल-भर में ज़मीन चटा दूंगा.
साहिल की बातें सुन कर उस पहेलवान को बहोत गुस्सा आया, उस ने साहिल से कहा एक नौसिखा मुझे क्या हरायेगा, मै तेरा वह हाल करूं आज पहला दंगल ही तेरा आखरी दंगल हो जायेगा.
 मैच शूरों हो गया, सामने वाला पहेलवान गुस्से में और जल्द बाजी में लड़ रहा था. बहोत ज्यादा गुस्सा होने की वजह से अपना ध्यान खेल पर नहीं लगा पा रहा था. साहिल ने इसी बात का फायेद उठाया, देखते ही देखते साहिल के पॉइंट में बड़ते चले गए. यह देख सामने वाला पहेलवान और ज्यादा घबराकर एक बड़ी गलती कर दिया जिसका साहिल ने पूरा फायेदा उठाया और सामने वाले पहेलवान को पछाड़ दिया. साहिल ऊपर उठा और उस निचे गिरे हुवे पहेलवान से कहने लगा.
“मै घोड़े के ट्रीगर पर नहीं खुद के जिगर पर बाज़ी जीतता हूँ और जस्बा तो दुनिया को मुट्ठी में करने का रखता हूँ.”
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साहिल के दोस्त और दुसरे पहेलवान साहिल को कंधे पर उठाकर महादेव सर के पास लेगए. महादेव सर के करीब जाने के बात साहिल अपने दोस्तों के कंधे से निचे उतरा और महादेव सर के पैरों में गिर कर शुक्रीय कहा. महादेव सर साहिल से बहोत खुश हो गए. उन्हें लगा जो बिना प्रैक्टिस के बिना ज्यादा सीखे मेरे एक बार कहने पर मान गया. एक दिन बहोत बड़ा खिलाडी बनेगा ऐसा महादेव सर को लगने लगा.
साहिल को जीत में मेडल और बीस हजार रुपियें का इनाम मिला. साहिल ने वह दोनों लेजाकर महादेव सर के पैरों में रखा और अश्क बार हालत में कहा.
सर आपका मुझ पर बहोत बड़ा अहेसान के आपने मुझे इस काबिल समझा के मै भी कुछ हूँ.
महादेव सर ने साहिल से कहा.
    अरे पगले मेरा कहेका तुझ पर अहेसान येतो तेरी महेनत का नतीजा है जो तुझे इनाम की शकल में मिला. बस इतना कहेना चाहता हूँ तुझे यंहा पर ही नहीं रुकना है और भी बहोत से मेडल जीत ने हैं.

                               मिलते हैं अगले पेज पर....../

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