Irade


Story Section No. 1

https://www.wikidata.org/wiki/Q16734076
Story-of-Irade

यह कहानी है एक लड़के के इरादों की, जब भी वह लड़का कोई इरादा अपने दिल में करता तब उसे पूरा करने के लिए अपनी जान भी दाव पर लगा देता था. उसे बच
-पन से पहेलवान बन्ने का बेहत शौक था. आगे चलके वह लड़का एक दिन देशका सबसे बहेतर पहेलवान तो बन ही गया साथ में पुरे विश्व में सबसे अच्छा बॉक्सर बन गया.
लेकिन इस बिच उस लड़के को बेहत परेशानियों और दुःखों से गुजरना पड़ा. उस लड़के का नाम साहिल था, नाम साहिल था लेकिन साहिल को अपनी जिंदगी का कभी भी किनारा नहीं मिला.
जैसे के बहोत से किस्मत वाले लोग होते हैं जिनके माँ-बाप का साया उनके सर पर सही सलामत होता है, उनकी बीवी का साथ पूरी जिंदगी भर उनके साथ चलता हैं और आखिर में जब वह थक जाते हैं तब उनके बुढ़ापे की लाठी उनके बच्चे बन जाते हैं.
साहिल का बच्च-पन से एक ही सपना था अपनी माँ को देश का एक नंबर पहेलवान बनकर दिखाना. लेकिन कहते हैं ना ऊपर वाला जिसे चहाता हैं उसका ही इम्तेहान लेता हैं. इस दुनिया में जंहा साहिल जैसे लोग हैं वंहा साहिल के उलट भी लोग है उन्हें ऊपर वालेने सब-कुछ दिया लेकिन वह हमेशा नाशुक्र करते रहे और साहिल जैसे लोग जब भी परेशानी आती तब उस परेशानी को लेकर हाहा कार करने की बजाए उसका डटकर मुकाबला करते.
    साहिल को एक छोटी बहन और एक भाई था. पिता कुछ भी काम किया नहीं करते थे, जिसकी वजह से साहिल के कंधो पर बचपन से ही अपने माँ और भाई-बहन की ज़िम्मेदारी आ गई थी. साहिल बच-पन से काम करके अपने घरवालों का पेट भरता था. हर रोज़ सुबह ४ बजे उठकर अकेला ही कसरत किया करता, अपनी कसरत पूरी होने के बाद अपने काम के लिए चला जाता.
साहिल को जैसे ही अपने काम से छुट्टी मिलती तब वह स्कूल को जाता. साहिल में बहोत सी खूबियां थी और उन सब में सबसे खास उसकी मासुमियत और उसकी बातें.
साहिल हर किसी से बहोत कम बातें करता था और जब भी बात करता बहोत अनमोल किया करता था. साहिल की इन बातों को देखते हुवे एक दिन साहिल के सर ने साहिल को एक सुविचार (Thoughts) की किताब पढने के लिए दिया. उस किताब का साहिल पर बहोत प्रभाव पड़ा, साहिल किसी को नसीहत या कुछ समझाना चहाता तब उसकी बातों में वह सुविचार होते.
हर कोई साहिल पर तरस खाता उसकी मदत करना चहाता, क्यों के साहिल बहोत कम लोगों की मदत लेता. साहिल को पता था के हर्किसी के सामने हाथ फैलाने से एक दिन कोई भी मदत नहीं करेगा. साहिल जहां काम किया करता था उस दुकान का मालिक साहिल को खाली टाइम में स्कूल जाने की इजाज़त देता और स्कूल टीचर भी साहिल को कभी भी आने-जाने से नहीं रोकते थे.
    देखते ही देखते और कुछ साल बित गए, अब साहिल भी बारावी क्लास पास हो गया. अब साहिल का वंही एक ही मकसत था, अपने घर को चलाते-चलाते देश का सब से बड़ा पहेलवान बनकर अपनी माँ को दिखाना हैं.
    साहिल दुसरे शहर गया जंहा पर पच्चों को पहेलवान बन्ने के लिए तयार करते थे. उस स्कूल को पहेलवान का अखाड़ा भी कहा जाता हैं. साहिल की वंही पर नौकरी लग गई साफ-सफाई, खाना बनाना, और भी बहोत से दुसरे काम करने पढ़ते थे. साहिल के जैसे काम करने वाले और बहोत से लड़के थे जो वंहा पर काम किया करते थे.
    उस अखाड़े में सिखने आय हुवे बच्चों को जो कुछ वंहा सिखाते वह सब साहिल दिन भर काम करते-करते देखता और रात में अकेला ही उसे याद करके प्रैक्टिस किया करता. इस तरह और कुछ दिन बित गए और फिर कुछ महीने, एक दिन साहिल के साथ काम करने वाले दोस्त साहिल का मजाक उड़ाते हुवे कहते हैं.
    “अबे इतनी मेहनत मत कर मरजायेगा”
 उन सब की हसी और बातें सुन कर साहिल ने उनसे कहा.
    “अभी ना पूछो हमसे मंजिल कहां है अभी तो हमने चलने का इरादा किया है ना हारे है ना हारेंगे यह किसी और से नहीं खुद से यह वादा किया हैं”



                                     मिलते हैं अगले पेज पर....../

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