Irade

Story Section No. 2

https://www.wikidata.org/wiki/Q16734076
Story-of-Irade

महीने के आखिर में जब भी पगार मिलती साहिल को तब साहिल सारे-के-सारे पैसे अपनी माँ को भेज देता और अपने खुद के खर्चे के लिए एक भी पैसा पगार में से नहीं लेता. साहिल के साथ काम करने वाले दोस्त साहिल से कहते. अपने लिए कुछ तो पैसे रखलेता तब उन्हें साहिल कहेता. मुझे पैसों की क्या ज़रूरत हैं, खाना और रहेना फ्री में होजारहा हैं फिर किस लिए अपने पास रखूं पैसे. मेरी ट्रेनिंग के लिए जो पैसे लग रहे हैं तो उनका इन्तेजाम मै एक्स्ट्रा शिफ्ट में काम करके करले रहा हूँ.
    अखाड़े में काम करने वाले जितने भी बच्चे और लोग थे उन्हें रहना और खाना फ्री था इसके सात एक्स्ट्रा काम करने पर अलग से पैसे मिलते थे.
    साहिल दिन भर काम करता और रात में जिधर उधर चले जाने के बाद जो कुछ दिन में देखकर सिखा उस पर रात में प्रैक्टिस किया करता. महिना ख़त्म हुवा तब जो तनखा मिली वह सारी की सारी अपनी माँ को भेज देता. इसी तरह दिन-ब-दिन गुज़र ते चलेगाए और दिनसे महीने और महीने से पूरा एक साल गुज़र गया.
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    अब आय खेलों के दिन मत-लब हर साल बच्चों के खेल का दंगल होता था. शुरवात होती थी पहले गांव के जितने भी अखाड़े हैं उनके बच्चों की कुश्ती की, जो बच्चा सामने वाले को हराता हुवा यानी जितने अखाड़े हैं उनके जितने भी बच्चे थे उन सबको हराना होगा तभी वह एक नंबर के स्थान पर पहुंचेगा.
       साहिल जिस अखाड़े में काम करता था वंहा का ही नया बच्चा हर साल बाज़ी मारता था. इस साल भी महादेव सर ने अपने अखाड़े से एक बच्चे को दंगल में उतारा.
महादेव सर उस अखाड़े के मालिक थे जंहा साहिल काम किया करता था. महादेव सर बहोत अच्छे इंसान थे, उनकी पत्नी का जवानी में ही देहांत हो गया था. महादेव सर को एकलौता एक ही बेटा था. महादेव सर ने दूसरी शादी इस लिए नहीं की थी क्यों के उन्हें लगता था मेरी आनेवाली दूसरी बीवी की वजह से मेरे बेटे की जिंदगी कंही ख़राब नहीं हो जाए इस लिए उन्हों ने दूसरी शादी नहीं की, लेकिन अपने बेटे को महादेव सर ने जितने लाड प्यार से पाला था वह सब और उनकी परवरिश उनके बेटे के अश्थियों के साथ ही गंगा में बहे गए.
    महादेव सर रात को जब सब सो जाते तब पुरे अखाड़े का चक्कर काटते सब पर नज़र डालते और साहिल को भी रात में अकेला प्रैक्टिस करते हुवे दूर से चुप-चाप देखते और बिना कुछ कहे चले जाते. महादेव सर को साहिल में अपना गुज़रा हुवा बेटा नज़र आता लेकिन इस बात को महादेव सर ने किसी से कहा नहीं.
    दंगल शुरू हुवा पांच अखाड़ों के बच्चे आपस में भिड़े फिर उनमें से जो जीते वह आपस में भिड़े. आखिरी दंगल था महादेव सर के अखाड़े के बच्चे में और दुसरे अखाड़े के बच्चे में, दंगल शुरू हुवा और कुछ देर बाद महादेव सर के अखाड़े का बच्चा जान-बुच कर हार गया. आज-तक महादेव सर के अखाड़े का कोई भी बच्चा नहीं हारा आज पहली बार हार मिली महादेव सर के बच्चे के ज़रिए उनके अखाड़े को.
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महादेव सर फ़ौरन समझ गए उस हार को और उस के पीछे की चाल को लेकिन महादेव सर चुप रहे उन्हों ने किसी से नहीं कहा बलके हारने वाले लड़के का और अखाड़े के सभी बच्चों का मनोबल बहोत बढाया साथ ही उस लड़के को मौका दिया सुधर ने का चुप रहे कर.
अगले दिन साहिल कमरों की साफ-सफाई कर रहा था तभी दुसरे कमरे से दो बच्चों की बातें करने की आवाजें आ रही थी. साहिल अपना काम करते-करते उनकी बातें सुनने लगा. कल जो लड़का दंगल में रहा था वह और उसका दोस्त बातें कर रहे थे के हारने के कितने पैसे मिले. साहिल ने जब यह बात सुनी तब साहिल उस कमरे में गया और उनसे कहा.
“पैसा हैसियत बदल सकता है औकात नहीं.”
पहले तो साहिल को देखते ही वह दोनों बहोत सहेम गए फिर साहिल की बातें सुनी तब वह अपनी ही नज़रों में गिर गए. उन्हें इस बात का भी अहेसास हो गया के काम करने वाला हमारी चोरी पकड़ लिया हैं तोह महादेव सर को उसी दिन अंदाज़ा हो गया होगा के मै जान-बूज कर हरा. उनके शक को साहिल ने इस बात से यकीन में बदल दिया.
महादेव सर इस लिए चुप रहे उस दिन क्यों के “सही टाइमिंग पर लग-भग हर बात सकारात्मक तरीके से कही जा सकती है.” यह कहेकर साहिल वंहा से चला गया.
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    उसी रात हर रोज़ की तरह साहिल रात में अकेला प्रैक्टिस कर रहा था, तब वंहा पर ग्राउंड में महादेव सर खुत को आने से नहीं रोक पाए और साहिल के करीब आकर कहा.
तुम यहां पर काम करने आय हो या सिखने.
सर काम करना इस लिए ज़रूरी है, मै माँ को भूका सुता नहीं देख सकता और सीखना इस लिए ज़रूरी हैं मेरी माँ उसका सर ऊँचा कर के जिए और वह दूसरों से यह कहे मेरा बेटा भी खुच हैं, उस का भी इस दुनिया में बहोत नाम हैं, और वह मेरा बेटा है. बस इन्ही बातों को पूरा करने के लिए मै यंहा हूँ.
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