Irade


Story Section No. 9

https://www.google.co.in/search?client=opera&tbm=isch&sa=1&ei=d_gdXdfQMtCPwgPZ9aPoCg&q=salman+khan+boxer&oq=salman+khan+boxer&gs_l=img.3..0i24l3.8746.11648..12792...0.0..0.197.969.0j6......0....1..gws-wiz-img.......35i39j0i67j0j0i8i30.zuAaQLFtel0#imgrc=F7ajaz454qdpQM:,https://www.wikidata.org/wiki/Q16734076,https://en.wikipedia.org/wiki/Kiara_Advani,https://www.google.co.in/search?client=opera&tbm=isch&sa=1&ei=hfgdXduPLsG4vgSQiIvYAQ&q=salman+khan+new+movie&oq=salman+khan+new+movie&gs_l=img.3..0l10.86389.90189..91993...0.0..0.218.2280.0j13j1......0....1..gws-wiz-img.......35i39j0i8i30j0i24.LEGYOrOHBlI
Story-of-Irade

कल साहिल ने अपना सपना पूरा किया और आज साहिल ने अपनी माँ की आखिरी आरजू को पूरा कर दिया. साहिल ने पायल से शादी की, शादी ज्यादा धूम-धाम से नहीं की, शादी में महादेव सर पायल के घर वाले और अपना छोटा भाई, बहन और बहन के ससुराल वालों को ही निमंत्रण किया. साहिल ने अपनी शादी में और किसी पराये को नहीं बुलाया था.
शादी होने के बाद साहिल ने महादेव सर से कुछ मांगा.
साहिल:- सर आपको याद ही होगा, मैंने आपसे कहा था. मै आपका सपना एक दिन ज़रूर पूरा करूँगा. क्या आप उस मैनेजर को कहोगे जो आपके बेटे को बॉक्सिंग सिखाया करते थे वह मुझे भी सिखाय.
महादेव सर:- हां मुझे तुम्हारी कही बात याद हैं. उनका नाम रवी हैं और मै अगले हफ्ते उन से बात करूंगा. मैंने तुम्हारे लिए यह तूफा लाया हैं पहले इसे लो और मना मत करना.
    महादेव सर ने तोफे में उनका स्कूल और उनका घर साहिल के नाम कर दिया. महादेव सर के बाद वह चाहते थे साहिल इस स्कूल की देख रेख करें. महादेव सर का यह तोफा देख साहिल की आँखों में आंसू आ गए और उसने महादेव सर से कहा.
साहिल:- मै इस काबील नहीं हूँ सर, जो आपने मुझे समझा हैं. आपका मुझ पर पहले से ही बहोत अहेसान हैं. आप ही इस स्कूल को अच्छे से चला सकते हैं.
महादेव सर :- साहिल तुम्हे पता नहीं लेकिन जब मैंने तुम्हे देखा था तब मेरी चिंता दूर हो गई थी के मेरे बाद अब स्कूल को चलाने वाला मिल गया हैं.
    साहिल के बहन भाई और महादेव सर, इन सब ने मिलकर साहिल और पायल को दिल्ली हनीमून के लिए सारा इंतेज़ाम करके ज़बरदस्ती भेज दिया. यह सब इतना जोर ज़बरदस्ती कर रहे थे इस लिए साहिल और पायल मना नहीं कर पाए.
    एक हफ्ता दिल्ली में गुज़ार ने के बाद साहिल और पायल अपने घर वापस आए. साहिल कुछ दिन अपने घर रहा फिर वापस चला गया महादेव सर के घर में पायल के साथ रहने लगा.
    अगले दिन महादेव सर ने रवी सर को बुलवाया साहिल की ट्रेनिंग के बारें में बात करने के लिए. रवी सर आए उनसे बात हो गई वह राज़ी हो गए साहिल को सिखाने के लिए. आज से ठीक बारा महीने बाद ही दुनियां का वर्ड हेवी वेट बॉक्सिंग मैच था.
    साहिल के बॉक्सर बन्ने के साथ साथ महादेव सर ने स्कूल के लिए यह फैसला लिया. आज से स्कूल में पहेलवानी के साथ बॉक्सिंग भी सिखाई जाएगी. अगले कुछ दिनों में सारा इन्तेजाम जल्दी-जल्दी कर दिया गया और फ़ौरन साहिल की ट्रेनिंग शुरू करदी गई. वक़्त बहोत कम था साहिल को सिखने के लिए. इस लिए ज्यादे से ज्यादा वक़्त साहिल को अपनी ट्रेनिंग के लिए देना पढ़ रहा था. पायल के साथ बहोत कम दिन पुरे साहिल ने गुज़ारे थे.
एक दिन साहिल पायल से कहेता हैं.
साहिल:- कुछ महीनों की बात हैं फिर तुम्हे और स्कूल को ही टाइम दूंगा. मुझे एक बार महादेव सर का सपना पूरा करलेने दे.
    पायल साहिल की हिम्मत बन गई थी नाके उसकी कमजोरी. पायल साहिल का बहोत कुछ काम किया करती थी और एक बेटी की तरह महादेव सर का ध्यान रखा करती थी.
    साहिल को पहली बार आज एक ख़ुशी मिली वह बाप बन्ने वाला था. सब कुछ ठीक चल रहा था इसी तरह 9 महीने गुज़र गया. आज साहिल को बहोत प्यारा बेटा हुवा जिससे देख साहिल और सभी बहोत खुश हो गए. अगले दिन पायल की हॉस्पिटल से छुट्टी होने वाली थी. हॉस्पिटल में पायल की माँ पायल की देख भाल कर रही थी.
    आज साहिल ने अपनी प्रैक्टिस से छुट्टी ली हॉस्पिटल से पायल और अपने बेटे को घर लाने के लिए. पायल की माँ पायल के साथ हॉस्पिटल में पीछे तीन दिन से अकेली थी इस लिए साहिल ने उन्हें घर सुबह को ही भेज दिया था. दोपहर हो गई डॉक्टर ने छुट्टी देदी महादेव सर की गाड़ी स्कूल के एक आदमीने चलाते लाई. साहिल अपने बेटे को लेकर अगली सीट पर बैठ गया और पिछली सीट पर पायल और महादेव सर बैठे.
    कुछ दूर चलने के बाद अचानक एक ट्रक ने कार की लेफ्ट साइड पर पीछे से बहोत जोर से टक्कर मारी. उस ट्रक ड्राईवर ने अपना ट्रक से कंट्रोल खो दिया था इस लिए यह अक्सिडेंट हो गया. साहिल की कार दूर जा गिरी आस पास के लोगोंने कार में से सभी को बहार निकला. साहिल ने अपने आपको और अपने बेटे को किसी तरह बचा लिया था, साहिल को बहोत सी चोटे आई थी. साहिल दूसरों की मदत से फ़ौरन बहार आ गया और उसने एक आदमी के पास अपना बच्चा देकर गाड़ी से महादेव सर और पायल को बाहर निकला. महादेव और पायल को बहोत चोटे लग गई थी इस लिए वह नहीं बच पाए.
महादेव सर ने साहिल से अपनी आखरी बात कही.
महदेव सर :- मै तुम्हे अकेला छोड़ जा रहा हूँ मेरी यह बात हमेशा याद रखना. “जिंदगी उसी को आजमाती है जो हर मोड़ पर चलना जानता हैं.” जिंदगी में कभी भी हर मत मानना. मेरी बहोत अरजो थी तुम्हे बॉक्सिंग का मैच जीतते हुवे देखना.
    यह कहते-कहते महादेव सर इस दुनिया को छोड़ चले गए. साहिल उनसे कहता हैं.
साहिल:- आप भी माँ की तरह मुझे अकेला छोड़ चले गए.
    पायल को बहोत चोटे लग गई थी इस लिए वह बेहोश हो गई थी. किसीने एम्बुलेंस को बुलवाया था, एम्बुलेंस फ़ौरन आ गई. उस अम्बुलेंस में साहिल ने पायल को हॉस्पिटल ले आया. डॉक्टरों ने कुछ देर तक कोशिश की पायल को बचाने की लेकिन पायल मौत से हार गई.
साहिल लाचार, बेबस, अश्कबार होते हुवे पायल के करीब जाकर पायल की लाश से कहेता हैं.
साहिल:- तुम सब मुझे इस तहर अकेला यंहा पर छोड़कर चले जाओगे तो भला मै कैसे जिंदा रहुंगा.
    देर रात पायल, महादेव सर, और कार चलाने वाले, इन तीनों का एक साथ ही अन्तिमसंस्कार कर दिया गया.
    अगले दिन साहिल ने लोगों के लिए मिसाल बनकर दिखाया. साहिल ने अगले दिनसे ही अपनी प्रैक्टिस दुगनी ताकत से शुर करदी. मैच में कुछ दिन बाकी थे वह भी गुज़र गए. आज साहिल का बॉक्सिंग मैच हैं.
    कुछ देर बाद मैच शुरूं हो गया पहले तीन राउंड तक साहिल सामने वाले पर भारी पड़ा लेकिन चौथे राउंड से सामने वाला साहिल पर भारी पड़ गया. वह साहिल को बुरी तरह से पिटता गया लगातार कुछ राउंड तक ऐसा लगने ला साहिल का यह आखरी मैच हैं लेकिन तब साहिल ने उसका ऐसा मुकाबला किया के वह साहिल के सामने टिक नहीं पाया और साहिल वह मैच जित गया.
    कुछ दिन गुज़रे और दिनों से महीने गुजरने लगे और महीनों से साल बीदते गए. आज साहिल की 55 वी सालगिरह थी. इस मौके पर साहिल का एक टी.वी. चैनल पर इंटरव्यू था. साहिल ने अपने जिंदगी में बॉक्सिंग से बहोत नाम कमाया था. साहिल नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल बन गया था. हर कोई बड़ा होकर साहिल की तरह पहेलवान या बॉक्सर बनना चाहता था. लेकिन उस का बेटा ना तो साहिल की तरह बनना चाहता था ना साहिल को वह पसंद करता था. साहिल अपने बेटे के करीब किसी ना किसी बहाने से करीब जाने की कोशिश करता तब उसका बेटा हर पल अपने और साहिल के बीज दुरी बनाता उसने साहिल के दुःख या साहिल की परेशानियों को समझा ही नहीं. इस बात से साहिल अन्दर ही अन्दर बहोत टूड गया था. साहिल हार माने वालों में से नहीं था इस लिए वह यह बात किसी पर ज़ाहिर नहीं होने देता था.
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    आज इंटरव्यू जाने से पहले साहिल अपने स्कूल पर गया वंहा अपनी पुराणी यादें याद की फिर उस दुकान पर गया जंहा पर वह बचपन में काम किया करता था. चलते चलते साहिल उस जगह पर पहोंच गया जिस जगह साहिल को पायल पहली बार मिली थी. फिर आखिर में अपने पुराने घर गया जंहा उसने अपना बचपन गुज़ारा था. अपनी माँ की तस्वीर को देख कर आज पहली बार जीभर के रोते हुवे अपनी माँ की तस्वीर से कहता हैं.
“माँ मुझे लोग समझ ते है मै हमेशा से जीत ता आया हूं लेकिन में तो हर पल हारता आया हूं. मै मेरे जस्बात किसी अपने से कहेना चाहता हूं लेकिन मेरे पास मेरा अपना सुननेवाला कोई नहीं.”
कुछ वक़्त अपने घर पर गुज़ार ने के बाद साहिल इंटरव्यू के लिए चला गया.
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    साहिल ने इंटरव्यू दिया उनके सवालों के जवाब दिए,
पत्रकार:- आपका साथ किसने सबसे ज्यादा दिया हैं और आप कैसे यंहा तक पहुंचे?.
साहिल:- मेरे इरादे और अपनों को किए वादों की वजह से मै यंहा तक इस मुकाम पर पहुंचा हूँ. और रही साथ की बात, मेरी तनहाई ही मेरी बहेतत्रीन साथी थी जो मेरे मरने के बाद ही मेरा साथ छोड़ेगी. आपके इस इंटरव्यू के जरये मै मेरे बेटे को एक सलहा देना चाहता हूं. बेटा कभी जिंदगी में बुरे दिन से तुम रू-ब-रू हो जाओ तो, इतना हौसला जरुर रखना
 “दिन बुरा था जिंदगी नहीं” और जिंदगी जीने का और जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानने का तुम इरादा करना. मै भगवान से हमेशा तुम्हारे लिए यह दुवा करता रहुंगा. जिंदगी में मुझे जो ख़ुशी नहीं मिली वह तुम्हे भगवन ज़रूर दे.

The End Of Irade Story

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