Tere Naam 2 …… Radhe is Back


Story Section No. 3

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Story-of-Tere-Naam-2

    क्लास में रूद्र और उसके दोस्त पीछे के बेंच पर बैठा करते थे. रूद्र बार-बार उस लड़की को देखने लगा, क्लासेस ख़त्म हो गए, सारे लड़के और लड़कियां घर चले गए. वह लड़की और सीमा  पाटिल, रूद्र और रूद्र के बाकि दोस्त ही क्लास में थे बाकि सभी अपने घर चले गए.
वह लड़की सीमा से कहती हैं :- सीमा घर चले क्या? तुम्हारा और कुछ काम बाकि तो नहीं हैं.
सीमा :- नहीं तुम जाओ मै पाटिल के साथ आती हूं.
वह लड़की :- (चौंककर) पाटिल, पाटिल के साथ तुम कबसे रहने लगी और यह कब हुवा.
सीमा :- (मुस्कुराते हुवे) बहोत पहले ही हुवा था लेकिन सिर्फ पाटिल के तरफ से और मेरे तरफ से कल ही हुवा.
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    सीमा ने वह सारी बातें बताई जो कल हुई और रूद्र ने किस तरह उन्हें मिलाया. रूद्र के बारें में और भी बहोत से बातें सीमा ने उस लड़की को बताई. उनकी बातें ख़त्म होते ही वह लड़की अकेली अपने घर चली गई. उस लड़की के चले जाने के बाद रूद्र फ़ौरन सीमा के करीब आया उस लड़की के बारें में बात करने के लिए.
रूद्र :- सीमा तुम्हारी इस सहेली के नाम के अलावा बाकि सारी बातें बताओ मुझे.
सीमा :- बताती हूँ... हां. लेकिन रूद्र क्या बात हैं.
पाटिल :- क्या बात. यह क्या कहे रही हो सीमा, भाई प्यार-व्यार के लपड़े में नहीं पड़ता. हां लेकिन जब से तुम्हारी सहेली क्लास में आई तब से उसको एकसा टाके जा रहे हैं भाई सहाब.
रूद्र :- अबे चूब ...
सीमा :- पहले ही यह बेचारा मेरी सहेली का शेकर हो गया है और तुम सब मिलकर उसका मज़ा ले रहे हो.
रूद्र :- हां यह सारे तो मेरा मज़ा ले रहे हैं और तुम भी इनके साथ लुत्फ़ उठा रही हो.
    रूद्र के दोस्तों ने कुछ देर तक रूद्र का मज़ा लिया और फिर जाकर सीमा ने अपनी सहेली के नाम के अलावा सब कुछ बताया वह कौन हैं कहां रहेती हैं किसकी बेटी हैं. सब अपने अपने घर चले गए.
शाम हो गई रूद्र के मन यह इच्छा होई उसे देखने की, फिर क्या था रूद्र अपने दोस्त को ले पहुँच गया उसके घर. यानी उस लड़की के घर के बाहर की रोड पर अपनी गाड़ी से इधर-उधर चक्कर मारने लगा और आते-जाते उसे तलाश करने लगा के कब वह आएगी अबने घर के बहार और मै उसे देखूंगा. कुछ देर बाद वह लड़की अपने घर के बाहर टहेल ने के लिए आई. रूद्र के कुछ चक्कर मारने के बाद उसकी महेनत रन लाई और रूद्र को वह दिख गई. तब जाकर रूद्र को राहत मिली और वह अपने घर जाकर सो गया.
कुछ दिन तक यह सिल-सिला ऐसे ही चलता रहा. कॉलेज में रूद्र उस लड़की को उसके चोरी चुपके देखता जैसे ही वह लड़की रूद्र के तरफ देखती रूद्र फ़ौरन अपनी निगाहे दूसरी तरफ करता.
अगले दिन रूद्र के दोस्त सब एक साथ मिलकर बातें करते बैठे थे. तब रमेश रूद्र से कहेता हैं.
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रमेश :- अबे तू उससे अपने प्यार का इज़हार क्यों नहीं करता. इस तरह से तेरा बढ़ाई का यह साल बर्बाद हो जायेगा.
रूद्र :-  इस लिए तो रात को पढ़ता हूँ और दिन में उसे पटाने की कोशिश कर रहा हूँ. मै भी उसे बात करना चहाता हूं लेकिन जब वह सामने आती हैं तब बहोत डर जाता हूं.
रमेश :- अबे तू कबसे डरने लगा वह भी एक लड़की से, चल हम तेरी मदत करते हैं. सीमा कल कॉलेज की कैंटिन में तू उसे कुछ भी बहाना कर के लेकर आ और हमारे साथ बैठ जाना. तब रूद्र उसको उसका नाम पूछेगा, कुछ बात करेगा इस तरह से इस का काम बन जायेगा.
रूद्र :- अबे रुक जाओ इतनी जल्द बाज़ी मत करो. तेरी यह बातें सुनते ही मेरी धड़कन बड गई और मेरे पसीने छुट गए हैं.
सीमा :- रूद्र तू डर मत कल उसका नाम पुछ ही ले. ज्यादा से ज्यादा क्या करेगी कुछ बातें सुनाएगी और एकदा थप्पड़ मारेगी.
    यह कहे कर सीमा और बाकि सभी हसने लगे. आखिर यह तय हो गया कल उस लड़की को रूद्र उसका नाम पूछेगा.
    अगले दिन सीमा ने अपना काम कर दिया. वह अपनी सहेली को किसी तरह बहाने से कैंटीन ले आई और रूद्र के साथ बैठ गई. कुछ देर तक मारे डर के रूद्र के मुह से कुछ भी बात ही नहीं निकली. सारे दोस्त रूद्र को इशारा करने लगे के बात कर और उससे उसका नाम पुच्छ. कुछ देर बात रूद्र ने हिम्मत जुटाई और उससे उस का नाम पुच्छ लिया. रूद्र के पुच्छते ही वह लड़की भड़क गई मानो जैसे आग में पेट्रोल गिरता हैं और आग एक दम से भड़क जाती हैं.
वह लड़की :- तुम्हे उससे क्या मेरा नाम कुछ भी हो तुम्हे क्या करना और आइंदा मुझसे बाद करने की कोशिश भी मत करना. सीमा तू चल रही है क्या मेरे साथ? नहीं तो मै अकेली जा रही हूं.
    गुस्से में यह बातें करके वह वंहा से अकेली ही चली गई. रूद्र, सीमा,पाटिल, और बाकि सारे दोस्त चुप हो गए सब को जैसे सांप सुंग गया हो. कुछ देर तक रूद्र वंही पर रुका और अकेले ही बिना कुछ कहे अपने दोस्तों को अकेला छोड़ चला गया.
    इधर रूद्र के साथ यह सब हो रहा था और उधर राधे आश्रम से बाहर नहीं जाने का मन बना लिया था. ना किसी से मिलता और ना ही किसी से बात करता था. आश्रम में रहे कर वंहा के मरीजों का ध्यान रखा करता. आश्रम की सेवा करने में ही अपनी जिंदगी गुज़ार ने का फैसला राधे ने कर लिया था. आज भी राधे किसी को बात करें या ना करे या किसी की सुने, तो वह था असलम.
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हर हफ्ते असलम उस आश्रम जाता राधे से मिलने के लिए उससे बातें करने के लिए. राधे असलम से मिलता उसकी सारी बातें चुप-चाप खड़ा सुनता और कुछ देर बाद बिना कहे वापस आश्रम का काम करने चला जाता. असलम आश्रम हर बार इस उमीद को लिए आता के आज उस का दोस्त आश्रम को छोड़ हमारे पास सब भूल भुला कर वापस आएगा, लेकिन हर बार असलम हार जाता और अकेला ही वापस लौटता.
   --:: Meet In The Next Part of The Story ::--

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