Tere Naam 2 …… Radhe is Back


Story Section No. 4
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Story-of-Tere-Naam2

    रूद्र ने कुछ देर बाद हिम्मत जुटाई और उस लड़की से उस का नाम पुच्छ ही लिया. रूद्र के पुच्छते ही वह लड़की भड़क गई मानो जैसे आग में पेट्रोल गिरता हैं और आग एक दम से भड़क जाती हैं उसने इस गुस्से के अंदाज़ में रूद्र से कहा.
वह लड़की :- तुम्हे उससे क्या? मेरा नाम कुछ भी हो तुम्हे क्या करना, और आइंदा मुझसे बात करने की कोशिश भी मत करना. सीमा तू चल रही है क्या मेरे साथ? नहीं तो मै अकेली जा रही हूं.
    गुस्से में यह बातें करके वह वंहा से अकेली ही चली गई. रूद्र, सीमा,पाटिल, और बाकि सारे दोस्त चुप हो गए सब को जैसे सांप सुंग गया हो. कुछ देर तक रूद्र वंही पर चुप-चाप बैठा रहा और थोड़ी देर बाद अकेला ही बिना कुछ कहे अपने दोस्तों को वंही अकेला छोड़ चला गया.
    रूद्र के चले जाने के बाद सीमा फ़ौरन अपने सहेली के पास चली गई. सीमा ने उससे पूछा उसने आज इस तरह से रूद्र का अपमान क्यों किया. लेकिन उसने सीमा से उसी अंदाज में कहा.
वह लड़की :- अपमान काहेका अपमान अपने उस का अपमान नहीं उसके सवाल का जवाब दिया था.
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    सीमा ने अपनी सहेली के साथ बहोत देर तक बहेस की लेकिन वह नहीं मानी रूद्र से बात करने के लिए और उससे माफ़ी मांगने के लिए. आखिर में सीमा ने उससे अपनी दोस्ती ही ख़त्म कर डाली सीमा चली अपने रास्ते और वह लड़की चली अपने रास्ते, दोनों सहिलियाँ आज से अलग हो गई.
    एक हफ्ता गुज़र गया था, रूद्र अपने दोस्तों से मिलने लगा उनके साथ रहेंने लगा लेकिन ज्यादी बातें ना उनसे करता, सिर्फ उनकी कही बातों का जवाब दिया करता. वह लड़की जब सामने से गुज़र ती तब रूद्र अपने सामने कोई अनजान गुज़र रहा हैं ऐसा अपने दोस्तों को बताता उन्हें यह अहेसास दिलाने की कोशिश करता.
रूद्र कितना भी अपने दोस्तों से कहे या उन्हें यह अहेसास दिलाए के वह उस लड़की को भूल गया हैं लेकिन उस के दोस्त उसकी दिलकी बात को सुन्न लेते. जो बात रूद्र का दिल तब-तब कहेता हैं जब-जब वह लड़की रूद्र के सामने से चली जाती हैं और रूद्र उसको ना देखने का ढोंग कर रहा हैं. रूद्र का चहरा और निगाहे दूसरी तरफ लेकिन दिल-दिमाग उसकी तरफ तब रूद्र का दिल यह कहेता जब-जब वह उसके सामने से गुज़रती हैं.

  “रुकजा एक बार तो मुड़कर देख, युना मेरे प्यार को ठुकरा”
    दुसरे कॉलानी की तरह उस कॉलानी में भी एक छोटा सा गार्डन था लोगों को टहेलने के लिए. वह गार्डन ठीक उस लड़की के घर के सामने था. गार्डन और घर के बिच एक 30 फिट का रास्ता था. रूद्र किसी को बताए बिना उस गार्डन में अकेला हर रात जाता वंहा पर बैठ कर उस लड़की को देखता. उस लड़की के रूम की खिड़की गार्डन की तरफ रुख करके थी, रूद्र को वह वंहा से नज़र आती. कुछ घंटे वंहा बिताने के बाद रूद्र वापस अपने घर चला जाता. रूद्र अपने दोस्तों को यह कहेता, मुझे घर पर काम हैं, और घर वालों को यह कहेकर बहार चला जाता मै मेरे दोस्तों के साथ बहार जा रहा हूँ.
    इस तरह से एक और हफ्ता गुजर गया. एक दिन सुबह सीमा और पाटिल एक साथ कॉलेज जा रहे थे और ठीक उनके पीछे कुछ दुरी पर सीमा की सहेली अकेली चल रही थी. वंही टपोरी लड़के फिर दुबारा सीमा को छेड़ने लगे और उन में से दो लड़कों ने सीमा की सहेली का रास्ता रुका. पाटिल उनको कुछ कहने वाला था के उसे सीमा ने रोक दिया और उनका खुद जवाब दिया.
सीमा उनसे कहती हैं अपनी सहेली की तरफ देखते हुवे :- फिर वंही हरकत कर रहे हो शायद उस दिन की पिटाई भूल गए, और हां एक बार उसने छोड़ दिया तुम्हारी जली कटी बातें सुनकर क्यों के पहला प्यार हो समझ बैठा था. अगली बार बातें सुना ने की कोशी किना.... हां,,,/
टपोरी एक लड़का :- अबे यह क्या बोल रही हैं लगता हैं पागल हो गई हैं शायद.
दूसरा टपोरी लड़का :- अबे वह देख इनके कॉलेज का दादा आ रहा हैं. इसे छोड़ नहीं तो वह हमें मार-मार कर पागल कर देगा.
    यह कहेकर वह सारे रूद्र के करीब आने से पहले ही भाग गए. उनके जाने के बाद सीमा की सहेली सीमा के पास से गुज़रते हुवे जोर से यह कहते हुवे चली जाती हैं.
वह लड़की :- दोस्त – दोस्त जिससे गुंडे डर कर भाग जाते हैं और गुंडे उसे गोंडा कहते हैं... और वह दोस्त.../
    अपनी सहली की यह बात सुनते ही सीमा को गुस्सा आया वह उससे कुछ कहने वाली थी तभी पाटिल ने उसे रोक दिया यह कहेकर.
पाटिल :- जानेदे रूद्र आ रहा हैं, पहले ही वह बहोत टेंशन से गुज़र रहा हैं.
    रूद्र सीमा और पाटिल से कुछ दुरी पर पीछे से पैदल आ रहा था उसे आने में थोडा वक़्त लगा. रूद्र के आते ही पाटिल और सीमा उसके साथ चलदिये कॉलेज के लिए. कॉलेज की सीडी चड़ने के पहले रूद्र ने उन दोनों को रुकाया और पूछा क्या हुवा था वंहा.
रूद्र :- क्या हुवा था वंहा और सीमा क्यों नाराज़ हैं.
पाटिल :- उस दिन तुमने जो लडको को मारा था वह लड़के आज फिर दोबारा सीमा और उसकी सहेली को छेड़ रहे थे.
पाटिल की यह बात सुनते ही रूद्र बहोत गुस्से में आगया और उसकी पूरी बात होने से पहले ही रूद्र पाटिल से कहता हैं.
रूद्र :- तूने मुझे पहले बताया क्यों नहीं चल मेरे साथ मै अभी उनको सीधा करता हूँ.
सीमा :- रूद्र मै उनके वजह से नाराज़ या गुस्से में नहीं हूँ, बलके मेरी दोस्त ने तुझे समझे बिना कुछ और ही तेरी दोस्ती निभाने को गलत नाम दे दिया. मेरी सलहा आज से तू हमारे लिए जो मार पिटाई करता हैं वह छोड़ दे एक दम सीधा-साधा बंजा.
    सीमा की यह बातें सुनते ही रूद्र का जी भर गया वह उन्हें कुछ कहे बिना आगे चला गया. रूद्र हर रोज़ की तरह अकेला उस लड़की के गार्डन के सामने बैठे उसको उसकी रूम की खिड़की से दे रहा था. तब वह अपने आपसे कहेता हैं.
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रूद्र :- किसी ने सच ही कहा था. सच्चा प्यार करने वाले का चैन, सुकून सब छीन जाता हैं.



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