Tere Naam 2 …… Radhe is Back


Story Section No.7


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Story-of-Tere-Naam2

सीमा के पिता ने रूद्र को अपने आदमियों से बहोत पिटवाया और खुदने रूद्र के सर पर लोहे के रोड से बहोत से वार किए. रूद्र को इतनी मार पड़ी के वह अदमरा हो गया. रूद्र को बहोत पिटने  के उसे उसके घर के बहार लेजाकर फेक दिया.
रूद्र के माता पिता अपने बेटे को इस हालत में देख बहोत घबरा गए. उन्हों ने किसी तरह अपने आपको संभाला और अपने बेटे को ले गए हॉस्पिटल. हॉस्पिटल ले जाने के बाद कुछ देर में रूद्र के सारे दोस्त फ़ौरन हॉस्पिटल पहोंच गए उनमें सीमा और पाटिल भी थे. रूद्र को डॉक्टरों ने उनकी कड़ी महेनत के बाद किसी तरह बचा लिया लेकिन रूद्र को सर पर ज्यादा छोटे लगने की वजह से वह कोमा में चला गया था. डॉक्टरों ने रूद्र के माता पिता से यह साफ साफ कहे दिया था के रूद्र कोमा से अब बाहर कभी नहीं आ सक्त हैं अगर कोई चमत कार हो गया तो ही रूद्र कोमा से बाहर आ सक्त हैं.
डॉक्टरों की यह बात सुनते ही रूद्र के पिता ने फ़ौरन यह फैसला किया के रूद्र को वह आश्रम ले जायेंगे वंही पर चमतकार होते हैं और रूद्र को वह ही ठीक कर सकते हैं. अगले दिन रूद्र को ले गए आश्रम. रूद्र के माता पिता के साथ रूद्र के सारे दोस्त थे. सीमा और पाटिल ने रूद्र के माता पिता की हॉस्पिटल में बहोत मदद की थी. वह दोनों तब से घर नहीं गए थे जबसे रूद्र को हॉस्पिटल लाए थे. सीमा रूद्र का ध्यान अपने भाई की तरह रखने लगी और रूद्र की माँ के काम में उनकी बेटी की तरह हाथ बटाने लगी.
जब रूद्र को आश्रम ले आए थे तब असलम राधे से मिलकर बाहर आ रहा था तब उसकी नज़र रूद्र और उसके दोस्त, माता, पिता पर पड़ी. असलम को गुज़रा हुवा कल नज़र आया के वह भी सारे दोस्त मिलकर राधे को भैईया और भाभी के साथ इसी तरह आश्रम ले आए थे. असलम चुप-चाप उनके पीछे-पीछे चल पड़ा उनके बारें में जानने के लिए. सारी फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद रूद्र को आश्रम में भर्ती करने के बाद सब चले गए अपने अपने घर. सीमा और पाटिल ने रूद्र के माता पिता को ऑटो में बिठाकर उन्हें घर भेज दिया. वह दोनों अपने घर जाने लगे तब असलम ने उन्हें रूकाकर रूद्र के बारें में पूछा.
असलम :- मेरा नाम असलम हैं आज तुम सब को देख हमारी पुराणी यादें याद आ गई. हमने भी कभी हमारे दोस्त को इस तरह इस आश्रम में भर्ती किया था. वैसे वह लड़का कौन था जिसके लिए तुम सब दोस्त इस तरह परेशान हो रहे हो.
सीमा :- उसका नाम रूद्र हैं, वह हमारे भाई से बढ़कर हमारा दोस्त हैं. यह जो उसकी हालत हो गई हैं वह हमारे साथ दोस्ती करने और उस दोस्ती को निभाने की वजह से उस पर यह मुसीबत आ गई हैं. उसने हम दोनों प्यार करने वाले को मिलाया हैं लेकिन उसके प्यार को उससे कोई नहीं मिलासका.
पाटिल :- आपका नाम असलम हैं ना? और राधे भाई भी यंही पर ही रहते हैं ना.
असलम :- हां
पाटिल :- राधे भाई बहार कब आएंगे.
असलम :- पता नहीं लेकिन आज एक उमीद जाग गई हैं तुम दुवा  करों तुम्हारे दोस्त के साथ हमारा दोस्त भी बहार आए.
    इनकी बातें ख़त्म होने के बाद सीमा और पाटिल अपने घर चले गए और असलम वापस राधे के पास चला गया उससे बातें करने के लिए. असलम के मन में यह उम्मीद जग गई के अब वह राधे को बहार लाने में कामियाब हो सकता हैं क्यों के आज मौका और दस्तूर बनके आगया हैं.
असलम :- मुबारक हो मेरे भाई आज से दुझे एक और तेरे जैसा ही दोस्त यंहा तुझे मिल गया हैं. तेरी निर्जरा की तरह उसकी भी एक प्रेमिका हैं जो उसे नहीं मिली हैं. वह इस लड़के का कुछ दिन तक इंतज़ार करेगी और फिर अपने आपको ख़त्म कर्देगी ठीक तेरी निर्जरा की तरह तब तू और यह मिलकर बैठना इस आश्रम की सेवा करते.
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    यह सारी बातें असलम ने राधे को गुस्से से कहे कर वह वंहा से चला गया. राधे ने उस लड़के को देखा तब उसकी अपनी पुरानी यादें ताजा हो गई. राधे ने पुजारी जी से यह विनती की के इस लड़के को आप अपनी सारी महेनत लगादे इसे ठीक करने में ताके आज के बाद फिर कोई अपनी निर्जरा से जुदा ना होने पाये.
  पाटिल और सीमा जब घर पर आए तब कुछ वक़्त गुज़र ने के बाद वह लड़की पाटिल के घर पर आई सीमा से मिलकर रूद्र के बारें में पूछ-ताज करने के लिए.
वह लड़की :- (सहमी हुवी उदास सी से) अब रूद्र कैसा हैं, वह जल्द ठीक तो हो जायेगा ना.
सीमा :- (बहोत गुस्से से) क्यों तुझे क्या करना उससे, तुझे कितनी बार उसने अपने प्यार का इजहार किया लेकिन तूने उसे और उसके प्यार को बहोत ठेस पहुंचाई. अब आई जब वह तेरी क्या किसी की बात सुनने के काबिल नहीं रहा. आरे उसने तो तेरा नाम तक किसी और से नहीं सुना उसकी दिली तमन्ना थी के वह तेरा नाम तुझी से सुने लेकिन तू तो उसकी एक बात भी नहीं सुन रही थी.
    सीमा की बातें सुनते ही उस लड़की के आंसू बहने लगे वह हाताश और शर्मिंदा होकर कहने लगी.
वह लड़की :- (रुते हुवे) मानती हूँ मैने रूद्र को बहोत ठेस बहोंचाई और बहोत बार बुरा भला कहा बिना उसके कसूर के, लेकिन एक बार तो मुझे मौका दो मेरी गलती सुधारने का. मुझे उससे मिलना है तुम मुझे किसी तरह उससे मिल्वादो मै तुम दोने के सामने हाथ फैलाकर भिक मांगती हूँ तुम से विनती करती हूँ.
    उस लड़की की इन बातों को सुनते ही सीमा का गुस्सा ख़त्म हो गया और सीमा ने उसे दिलासा दिया किसी तरह समझाया और उसे कल आश्रम लेजाने का वादा किया.
    आज सुबह सुबह सीमा पाटिल और वह लड़की रूद्र से मिलने के लिए आश्रम आए. उस लड़की ने जब रूद्र की लगी चोटों को देखा और रूद्र की हालत देखी तब वह अपने आपको रोने से नहीं रोक पाई. सीमा ने किसी तरह अपनी सहली को संभाला उसे दिलासा दिया के रूद्र बहोत जल्द वापस आएगा. तब वंहा राधे आ गया, राधे ने उस लड़की से कहा.
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राधे :- तुम अपने प्यार पर पूरा भरोसा रखना के यह लड़का इस आश्रम को छोड़ तुम्हारे पास बहोत जल्द आएगा और मै इस की मदद करूँगा यंहा से निकलने में तब-तक अपने आपको कुछ मत करलेना अगर मौत भी आकार तुम्हारी सांसों को तुम से छिन ले तब तुम उसके पास से अपनी सांसों को छीन लेना. वादा करता हूँ मै इसे तुम्हारे पास बहोत जल्द लेकर आऊंगा.
  राधे जब आया तब पाटिल राधे को देख बहोत कुश हो गया. उसकी सारी बातें बहोत खुश हो कर सुन रहा था और दिल ही दिल में राधे से डरा हुवा भी था. राधे की बात ख़त्म होते ही पाटिल ने सीमा और उसकी सहली से कहा.
पाटिल :- अब चलो रूद्र बहोत जल्द घर आएगा, क्यों की भाई ने एक बार कहे दिया तो कहे दिया.

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