Tere Naam 2 …… Radhe is Back


Story Section No.8


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Story-of-Tere-Naam2

राधे ने जो कहा था वह काम पूरा कर दिया. अगले दिनसे ही आश्रम के महाराज ने राधे के कहने पर अपनी सारी विद्या झोग्दी रूद्र को ठीक करने के लिए. आश्रम के महाराज की कड़ी महेनत  और उनकी जड़ी बूटी की वजह से रूद्र एक महीने में बिल्कुल ठीक हो गया. रूद्र को आहिस्ता आहिस्ता सब कुछ याद आ गया वह पहले की तरह धीरे धीरे चलने फिरने लगा. रूद्र की सेहत ठीक होने के बाद आश्रम से जाने की इजाज़त महाराज ने दे दी.
आज राधे और रूद्र दोनों एक साथ आश्रम से बहार आने वाले थे. आश्रम के बहार राधे के सभी दोस्त राधे का इंतेज़ार कर रहे थे और रूद्र के भी सारे दोस्त बहार खड़े रूद्र का इंतेज़ार कर रहे थे.
राधे ने रूद्र को सरप्राइज़ देने के लिए उस लड़की को रूद्र के घर रुकने के लिए कहा और उस लड़की के साथ रूद्र के माता पिता भी घर पर ठहरे हुवे थे. इस बात की भनक तक रूद्र को नहीं होने दी के वह लड़की रूद्र से प्यार करने लगी हैं वह भी इतना प्यार जितना वह उससे करता हैं.
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आश्रम से बहार आने के बाद राधे के सभी दोस्त बहोत कुशी से राधे से मिले और उनकी ही तरह रूद्र के भी दोस्त रूद्र से मिले. मिलना मिलना हो गया तब राधे ने रूद्र से कहा.
राधे :- रूद्र अब घर चलते हैं तुम्हारे माता पिता तुम्हारा घर पर इंतेज़ार कर रहे हैं.
    राधे, राधे के दोस्त और रूद्र, रूद्र के दोस्त यह सब मिलकर रूद्र के घर चले गए. घर पर पहोंच ते ही रूद्र की माँ ने रूद्र की आरती उतारी उन सब को घर में बिठाया. कुछ देर तक सब की हसी मजाक चलती रही फिर कुछ देर बाद राधे ने रूद्र को कहा.
राधे :- रूद्र मैने तुम्हारे लिए एक ड्रेस लिया है और वह तुम्हारे कमरे में है तुम जरा वह ड्रेस पहेन कर आओ.
रूद्र :- ( कुशी से ) अरे भाई इस की क्या ज़रूरत थी पहले ही आपने मेरे लिए बहोत कुछ किया हैं.
राधे :- मैने तुम्हारे लिए कुछ नहीं किया यह सब मै मेरे लिए कर रहा हूँ. (रूद्र का हाथ अपने हाथ में लेकर कहेता हैं) मै तुम में अपने आपको देखता हूँ मुझे जो नहीं मिला वह तुम्हे मिले इस लिए मै तुम्हारे साथ हूँ. अब जाओ ज्यादी बातें मत करो पहले वह ड्रेस पहेनकर दिखाओ.
रूद्र :- जी भाई अभी दो मिनट में पहेन कर आया.
    रूद्र अपने कमरे में गया तब उसे वंही लड़की ड्रेस हाथ में लिए खड़ी नज़र आई. रूद्र पहले उसे देख चौक गया फिर उसके करीब जाकर अपने आपसे कहने लगा.
रूद्र :- यार इतनी मार पड़ने के बाद भी इसे भूल नहीं पाया, कब तू मेरे प्यार को समझेगी के मै तुझसे कितना प्यार करता हूँ.

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वह लड़की :- रूद्र i-Love-you.
रूद्र :- (पहले तो उसकी यह बात सुनते ही डर गया फिर चौककर कहने लगा) अरे बापरे लगता है अभी मुझे और इलाज की ज़रूरत हैं. (यह कहते हुवे रूद्र अपने कमरे से फ़ौरन भागकर राधे के पास जाकर कहने लगा)  भाई चलो वापस आश्रम चलते हैं लगता हैं अभी मेरा दिमाग सही नहीं हुवा मुझे वंही हर जगा नजर आ रही है और मुझसे बात भी कर रही हैं.
    रूद्र की इन बातों को सुनते ही सभी हसने लगे राधे के चहरे पर भी मुस्कुराहट आ गई. राधे ने रूद्र का हाथ पकड़कर रूद्र के कमरे में ले गया और रूद्र से कहा.
राधे :- रूद्र तुझे इस लड़की का नाम पता नहीं हैं ना, अब पूछ बता देगी वह अपना नाम तुझे.
रूद्र :- (शर्मीली मुस्कुराहट से और सहमी नज़रों से) तुम्हारा नाम क्या हैं.
वह लड़की :- (रूद्र ने जैसे ही उसका नाम उससे पूछा वह फ़ौरन भागकर रूद्र के गले लग गई और तब अपना नाम रूद्र को बताया) मेरा नाम पायल हैं, सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी पायल.
    रूद्र और पायल को देख सब-के-सब बहोत कुछ हो गए और बाकि सबसे ज्यादा राधे इन दोनों को मिलता देख बहोत कुश हो गया. कुछ देर हसी मजाक होने के बाद राधे, उसके दोस्त और रूद्र के दोस्त यह सब अपने अपने घर चले गए. पायल कुछ देर तक वंही रूद्र के घर बैठी रूद्र से बाते करते रही.
रूद्र :- यह सब कब हुवा तुम कैसे क्या मेरे प्यार में पड़ गई.
पायल :- साचा प्यार किया था तुमने मुझसे मै कब-तक तुम से दूर रहती एक ना एक दिन मुझे तुमसे प्यार होना ही था जो हो गया.
    पायल ने रूद्र के माता पिता के साथ वक़्त गुज़ारा और कुछ वक़्त अकेले रूद्र के साथ बातचीत करके गुज़ारा दिन ढलने के बाद पायल अपने घर चली गई. इधर राधे अपने भाई और भाबी से मिला राधे के घर आने से राधे के भैया भाबी बहोत कुश हो गए. राधे भी पूरा दिन अपने भैया और भाबी से बातें करते बैठा था. राधे बहोत खुश रहने और निर्जरा की याद ना करने का ढोंग कर रहा था या यह जताने की कोशिश कर रहा था के उसे अब किसी बात का गम नहीं लेकिन अन्दर ही अन्दर निर्जरा को बहोत याद कर रहा था.
राधे के भाई को बैंक में नौकरी थी जब उन्हों ने वह नौकरी जॉइन की थी तब उन्हें आगरा की ही ब्रांच मिली थी लेकिन कुछ साल बाद उनका तबादला दिल्ली की ब्रांच में हो गया था और उनकी बेटी का नंबर देल्ली के एम.बी.बी.एस. कॉलेज में लग गया था इन दो वजहों से राधे के भैया, भाबी अपनी बेटी के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए थे.
आज भैया और भाबी ने राधे को बहोत बार कहा के वह हमारे साथ देल्ली आकर रहे लेकिन राधे ने आगरा को छोड़ किसी दुरसे शहर जाने से साफ मना कर दिया राधे ने अपना यह पूरा इरादा बना लिया था के वह आगरा छोड़ कही और रहने नहीं जाने वाला हैं.
    अगले दिन सुबह सुबह रूद्र तयार हो कर राधे के घर पर गया. राधे के घर पर सारे दोस्त आ गए, वह सब मिलकर कॉलेज जाने वाले थे. कुछ देर बाद राधे अपने पूराने स्टाइल में तयार होकर घर से बहार आया राधे को देख सबके सब दंग रहे गए. राधे जब से आश्रम गया था तब से राधे की बाइक असलम के घर पर थी. आज असलम ने राधे की बाइक का बचा कूचा काम करवा के धो धुला के वह बाइक राधे के घर पर लाई.
    राधे और उसके दोस्त और उनके साथ रूद्र और रूद्र के दोस्त यह सब अपनी अपनी बाइक पर कॉलेज जाने के लिए निकले. राधे की बाइक सबसे आगे थी और राधे की बाइक के पीछे दूसरों की बाइक थी.

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